कस्तूरबा स्कूलों में अव्यवस्थाओं का अंबार, 100 छात्राओं के सापेक्ष मनकापुर में 11 व मुजेहना में सिर्फ 34 छात्राएं मौजूद मिली

डीसी बालिका के निरीक्षण में खुली पोल,वार्डन को संविदा समाप्ति की चेतावनी

गोंडा। बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए संचालित कस्तूरबा स्कूल बदहाली का शिकार हैं। छात्रावास से लेकर रसोईघर तक में अव्यवस्थाओं का अंबार लगा हुआ है। नतीजा यह है कि 100 छात्राओं के नामांकन वाले इन स्कूलों के छात्राओं का मोहभंग हो रहा है। इन समस्याओं के बावजूद कागजों मे सबकुछ ठीक दिखाने का खेल किया जा रहा है। दो दिन पूर्व जिला समन्वयक बालिका शिक्षा ने मनकापुर व मुजेहना के कस्तूरबा स्कूलों का आकस्मिक निरीक्षण किया तो इनकी पोल खुल गई। डीसी बालिका ने दोनो स्कूलों की वार्डन को नोटिस देकर जवाब मांगा है और संविदा समाप्ति की चेतावनी दी है।

गरीब बालिकाओं को कक्षा आठ तक की निशुल्क शिक्षा प्रदान करने के लिए जिले के प्रत्येक ब्लाक मे कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय संचालित हैं। इन स्कूलों में प्रवेश लेने वाली छात्राओं को पढ़ाई के साथ साथ यहां आवासीय सुविधा भी प्रदान की जाती है। लेकिन इन स्कूलों की संचालन की जिम्मेदारी संभालने वाली स्कूल की वार्डन अपने जिम्मेदारियों का निर्वहन ठीक ढंग से नहीं कर रही है। परिणाम यह है कि स्कूलों मे समस्याओं का अंबार है। समुचित देखरेख के अभाव मे स्कूल बदहाली का शिकार हैं।

स्कूल में रहने वाली छात्राओं को न तो मीनू के अनुसार भोजन मिल रहा है और न ही उनके रहने का उचित प्रबंध है। छात्राओं को सोने के लिए दिए गए तख्त टूटे पड़े हैं और उन्हे जमीन पर सोना पड़ रहा है। इन समस्याओं का निराकरण न होने से छात्राओं का इन स्कूलों के मोहभंग हो रहा है और वह स्कूल नहीं जा रही हैं।

जिला समन्वयक बालिका शिक्षा रजनी श्रीवास्तव ने दो दिन पूर्व मनकापुर व मुजेहना मे संतुलित कस्तूरबा स्कूलों का औचक निरीक्षण किया तो यह हकीकत सामने आई। मनकापुर कस्तूरबा स्कूल मे 100 छात्राओं के सापेक्ष महज 11 छात्राएं मौजूद मिली। छात्राएं कब से स्कूल नहीं आ रही हैं पंजिका पर इसका अंकन नहीं मिला। मुख्य रसोईयां बिना किसी सूचना के गैरहाजिर मिलीं। दो शिक्षिकाएं भी छुट्टी पर मिली। स्कूल परिसर, छात्रावास, पुस्तकालय,रसोईघर सब बदहाल मिला। बायोमैट्रिक मशीन, सीसीटीवी व हैंडपंप खराब मिला। वार्डन व लेखाकार विद्यालय से संबंधित एक भी अभिलेख नहीं दिखा सके। यही स्थिति मुजेहना कस्तूरबा स्कूल मे भी मिली। यहां भी 100 के सापेक्ष 34 छात्राएं उपस्थित मिली। बायोमैट्रिक मशीन खराब मिली। खाद्यान्न पंजिका गायब मिली। आवागमन पंजिका अपडेट नहीं की गई थी। डीसी बालिका ने अपनी निरीक्षण रिपोर्ट बीएसए को सौंपी है और इसके लिए सीधे स्कूल की वार्डन को जिम्मेदार ठहराया है। डीसी बालिका रजनी श्रीवास्तव ने बताया कि दोनों स्कूलों की वार्डन को नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा गया है और उनकी संविदा समाप्त करने की चेतावनी भी दी गई है।

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